दुर्लभ और जन्मजात जटिल बीमारी से पीड़ित दो साल की बच्ची की पारुल सेवाश्रम अस्पताल में सफल सर्जरी हुई

मध्यप्रदेश की निवासी दो साल की बच्ची दुर्लभ और जन्मजात, ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी नाम की बीमारी से थी पीड़ित थी। यह बीमारी एक लाख मे से दो बच्चो में पाई जाती है।

इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के यूरिनल ब्लैडर (पेशाब संग्रह) पेट की दीवार से बाहर आने की वजह से व्यक्ति मूत्रमार्ग से लघुशंका करने में होता है असमर्थ

वडोदरा, शहर के अग्रणी पारुल सेवाश्रम अस्पताल ने हाल ही में ब्लेडर एक्सस्ट्रोफी नाम की एक दुर्लभ व जटिल तरीके की जन्मजात बीमारी से पीड़ित मध्यप्रदेश की एक दो साल बच्ची की सफलता पूर्वक सर्जरी की, और बच्ची को इस दुर्लभ बीमारी से मुक्ति दिलाई। जन्मजात बीमारी से पीड़ित बच्ची को इलाज के लिए शिशु रोग विभाग में लाया गया था। इस समस्या के कारण रोगी के पेट की दीवार का आगे का भाग अनुपस्थित था, जिस कारण पेट के आगे का हिस्से से यूरिनल ब्लैडर (पेशाब संग्रह) बाहर आ गया था। 

ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी एक दुर्लभ जन्म दोष है, जो एक लाख में से लगभग दो बच्चो में होता है। मूत्रांशय बाहर होने के कारण इस बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति स्वाभाविक रूप से पेशाब करने में असमर्थ होता है। लंबे समय तक ब्लैडर एक्सस्ट्रोफी की समस्या को नजरअंदाज करने से निचली पेल्विक हड्डियां अलग होने लगती हैं। इसलिए जब तक पेल्विक हड्डियां एक दूसरे के करीब नहीं आती तब तक इस जटिल समस्या का उपचार किया नहीं जा सकता। 

बच्ची के अस्पताल में भर्ती होने के बाद कम्पलीट प्राइमरी रिपेयर ऑफ एक्सस्ट्रोफी (Complete Primary repair of Enstrophy) किया गया, जिसमें मूत्राशय को आंतरिक रूप से बंद कर दिया गया और मूत्राशय के नेक को रिपेयर किया गया।  डॉ. मिशाल पटेल (अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ) ने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज पूरी निरंतरता के साथ मूत्रमार्ग के माध्यम से पेशाब कर सकेगी । ऑर्थोपेडिक प्रक्रिया में पेल्विक हड्डियों को नियंत्रित तरीके से दोनों तरफ से तोड़ा गया था और पेल्विक हड्डियों की दिशा बदलकर पेल्विक हड्डियों के आगे के हिस्से को  एक साथ लाया गया। इसके अलावा, मोटी मार्सेलिन टेप का उपयोग करके रोगी की पेल्विक हड्डियों को एक साथ लाने के लिए एक नई तकनीक का उपयोग किया गया, क्योंकि स्टेनलेस स्टील के तार आमतौर पर बच्चों की हड्डियों के लिए खतरनाक होते हैं। पेल्विक हड्डियों को स्थिर करने के लिए एक बाहरी फिक्सेटर का उपयोग किया गया। अस्पताल में कंसलटेंट आर्थोपेडिक सर्जन & प्रोफेसर डॉ. कार्तिक विश्वनाथन ने कहा कि ऑस्टियोटॉमी साइट ठीक हो गईं और पोस्ट ऑपरेटिव स्टे द्वारा बाहरी फिक्सेटर को हटाया गया। हमें यह बताते हुए गौरव  महसूस हो रही है कि बच्ची अब चलने, दौड़ने और अपने दोस्तों के साथ खेलने में सक्षम है।

 

महत्वपूर्ण बात यह है कि 750 बेड वाला यह मल्टी- स्पेशियलिटी अस्पताल उन्नत सर्जिकल सुविधाओं से सुसज्जित है और इन सुविधाओं के माध्यम से अस्पताल ने ह्रदय ब्रेन बगेरे की कई सफल जीवन रक्षक सर्जरी की हैं। पारुल सेवाश्रम अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. गितिका पटेल ने कहा कि इस प्रकार की जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी केवल एक बहु- विषयक टीम और अनुभवी एनेस्थेटिक, गहन देखभाल और पैरामेडिक बैकअप के साथ ही संभव है। पिछले कुछ वर्षों में पारुल सेवाश्रम हॉस्पिटल विभिन्न जटिल मामलों के गुणवत्तापूर्ण उपचार का केंद्र बन गया है, क्योंकि देश भर से चुनौतीपूर्ण तकलीफों से पीड़ित मरीजों को अस्पताल में भेजा जाता है।